what is love in hindi प्रेम क्या है।

नमस्कार साथियों आज के इस लेख में  (what is love in hindi) प्रेम क्या है, इसके वारे में विस्तार से जानेंगे।
Love image

शास्त्रों के अनुसार प्रेम क्या है

दोस्तों प्रेम शब्द कहना बहुत आसान है अर्थात् सभी लोग प्रेम प्रेम तो कहते हैं लेकिन प्रेम के गुण स्वरूप को नहीं जानते हैं। जिस मार्ग से परमात्मा की प्राप्ति हो, जिस साधना या युक्ति से प्रभु का दीदार हो यानि कि मिलन हो वही सच्चा प्रेम है।
प्रेम को हम कुछ उदाहरणों के साथ समझेंगे तो अच्छी तरह समझ में आएगा। 

चकोर पक्षी का उदाहरण

जिस प्रकार साधु संत बताते हैं, कि एक चकोर पक्षी होता है यह पक्षी सर्वाहारी होता है और पश्चिमी हिमालय के आस पास पाया जाता है विश्व भर में चकोर पक्षी की 14 प्रजातियां पाई जाती हैं ऐसा बताया जाता है कि जिस दिन पूर्णिमा की रात होती है उस दिन यह पक्षी चन्द्रमा की ओर देखता रहता है और यह रात भर चांद को ही देखते रहने के कारण अपनी जान गंवा बैठता है। अर्थात् ऐसा बताया जाता है कि उसे चन्द्रमा से इतना प्रेम होता है कि चकोर पक्षी रात भर अपने शरीर को भी नहीं हिलाता है सिर्फ उसकी गर्दन उधर घूमती रहती है जिधर चांद की दिशा होती है। 
ऐसा ही प्रेम अगर मनुष्य का प्रभु के नाम से हो जाए तो वह सर्वश्रेष्ठ प्रेम है। मनुष्य का शरीर उठते बैठते खाते पीते काम करते कहीं भी रहे, लेकिन मन और ध्यान परमात्मा के नाम में होने चाहिए यह प्रेम का सर्वश्रेष्ठ रूप है।

मछली का उदाहरण

इसी प्रकार मछली और पानी का प्रेम भी होता है। मछली पानी में रहती है लेकिन अगर कोई व्यक्ति उसे पानी से दूर कर देता है तो वह पानी के वियोग में तड़फ तड़फ कर प्राण त्याग देती है इसी प्रकार प्रेमी व्यक्ति को अगर कोई उसके प्रेम से यानि कि परमात्मा से दूर करने की कोशिश करता है तो उसको बहुत दुख होता है।

विषेश उदाहरण - आत्मा और परमात्मा का प्रेम

दोस्तों आपको क्या पता है कि जब से आत्मा परमात्मा से बिछड़ गयी है तब से वह परमात्मा की खोज में लगी हुई है और परमात्मा भी अपने बच्चों को यहां इस काल के लोक से निकालने के लिए इस धरती पर जगह जगह प्रकट होकर अपनी विषेश पुन्य आत्माओं को मिलते हैं। और ज्ञान का उपदेश करते हैं तथा अपने ग्रन्थ भी लिखवाते हैं जिसको पढ़कर पुन्य आत्माएं इस चौरासी के बंधन से छुटकारा पा सकते हैं। दोस्तों आप स्वयं सोचकर देखिए कि आप जिन ग्रन्थों को पढ़ते हैं क्या उन्हें कोई आम व्यक्ति लिख सकता है। जिन सन्तों की लिखी हुई पुस्तकें हम पढ़ते हैं गुरु ग्रंथ साहिब या सतगुरु ग्रंथ साहिब, दादू वाणी कबीर वाणी क्या उन्हें एक आम व्यक्ति लिख या बोल सकता है! नहीं दोस्तों यह सभी वाणी और ग्रन्थ परमात्मा की प्रेरणा से बोले और लिखे गए हैं।
परमात्मा ने जो ग्रन्थ लिखवाएं हैं वो क्या अपने लिए लिखवाएं हैं!  नहीं वो इसलिए लिखवाए गए थे ताकि जीव का भला हो सके लेकिन फिर अन्जाने में यह जीव परमात्मा को धिक्कारता रहा है और सन्तों को डले मारकर उनको बेइज्जत करता रहा है। धिक्कार है ऐसे मनुष्य जीवन पर!
दोस्तों अब आप ही बताइए कि कौन हमें प्रेम करता है जो हमारे लिए युगों युगों से भटकता डोल रहा है हमारे लिए गालियां सुन रहा है हमारे लिए धक्के खा रहा है हमारी रक्षा करने के लिए जो समय समय पर कहीं प्रगट हो जाता है या अवतार रखकर सन्त रूप में हम सभी को हमारा बोध कराता है अर्थात् हमें ज्ञान कराता है। 
या
वो स्त्री जो काम वासना की खान होती है और मरने के बाद भी हमें नर्क में ले जाती हैं फिर खाते रहो चौरासी लाख योनियों के धक्के! कभी सुअर बनोगे तो कभी गधा, कुत्ता, कीड़ा, आदि योनियों में भटकते रहोगे।
What is love in hindi

जब कोई व्यक्ति किसी स्त्री के प्रेम में पड़ जाता है तब क्या होता है

श्रीमद्भागवत गीता जी अनुसार जैसे कोई मनुष्य जब किसी सुन्दर स्त्री के प्रेम में पड़ जाता है जो जागते हुए उसी कल्पना और सोते हुए उसी के सपने देखता है। इस प्रकार निरंतर चिंतन से आसक्ति की नींव पर काम की भावना उभरने लगती है। काम या वासना में थोड़ी भी रूकावट आने से क्रोध का आगमन हो जाता है और जहां क्रोध है वहां सब मोह, अथवा अविचार, अथवा अविवेक भी है। जिस प्रकार प्रचंड वायु के झोके से दीपक की ज्योति बुझ जाती है उसी प्रकार काम जनित अविवेक की आंधी से मनुष्य की स्मृति नष्ट हो जाती है। और जब स्मृति भ्रष्ट हो जाती है तब बुद्धि नाश में कितना समय लगता है।

प्रेम और मोह में क्या अंतर है

जो स्थिर हो जाए जो किसी एक पर टिक जाए जो भाव मरने के बाद भी उसी एक पर स्थिर रहे वह प्रेम है और जो किसी कार्य से के बदले में हो या जो स्वयं की इच्छा पूर्ती के लिए हो या जो छिपकर किया जाए वो प्रेम नहीं है वह मोह है। 

sacha pyar kya hota hai

प्रेम की परिभाषा क्या है।

मित्रों हमने कई जगह प्रेम के पढ़ा और समझा है लेकिन कहीं भी प्रेम की असली परिभाषा समझ नहीं आयी। फिर हमने कबीर वाणी को पढ़ा और समझा कि असली प्रेम क्या है। कबीर जी ने कहा है कि - प्रेम भक्ति में रचि रहें, मोक्ष मुक्ति फल पाय।
शब्द मांहि जब मिलि रहै, नहिं आवै नहिं जाय।।
कबीर साहेब जी ने बताया है कि प्रेम के जानने वालों को चाहिए कि वह प्रेम और सेवा भक्ति में सदा दृढ़ रहे। उसे अवश्य ही मोक्ष व मुक्ति रूपी फल मिलेगा। परमात्मा के नाम में सुरति को समाकर सुमिरन करने से उसका इस संसार से आवागमन मिट जाएगा।
अर्थात् इस संसार रूपी भवसागर से पार करवाने वाला मार्ग ही प्रेम का मार्ग है।

pyar kaise hota hai

हमें असली प्रेम कैसे हो सकता है:-

अपने मन को निरंतर सच्चाई के मार्ग में लगाए रहना चाहिए और सन्तों की वाणी पढ़नी चाहिए। इससे प्रेम की उपज होती है। इस संसार में रहकर चलते फिरते उठते बैठते सच्चे सत्गुरु से प्राप्त मन्त्र का सुमिरन करना चाहिए। जिससे परमात्मा में हमारा प्रेम बनें और हमारी इस संसार से मुक्ति हो।
आपको हमारी यह पेशकश कैसी लगी जी आप हमें comment करके अवश्य ही बताएं।

You may like these posts